संविदा-सेवा बनाम स्‍त्री: डरावनी नजीर है मोहनलालगंज कांड

: तिल-तिल दम तोड़ती युवतियों का घटिया मृत्‍यु-द्वार है संविदा पर सरकारी नौकरी : समाज सम्‍भालने के साथ ही परिवार पालने की मजबूरी दबंग और सशक्‍त लोगों का चारा बन जाती है : संविदा-एक : कुमार सौवीर लखनऊ : सन-2014 की 17 जुलाई रविवार की सुबह लखनऊ में पीजीआई के पास मोहनलालगंज के एक प्राइमरी […]

आगे पढ़ें

पुलिस ने जिस लाश को वेश्‍या कहा, मैं उसे बिटिया कहता हूं

: राजधानी में मिली थी एक युवती की रक्‍तरंजित नंगी लाश : नवनीत सिकेरा व सुतापा सान्‍याल ने बिखेरीं यूपी की बेटियों की नंगी लाशें : कोई भी महिला अब सुतापा सान्‍याल को आदर्श न मानेगी : कुमार सौवीर लखनऊ : मोहनलालगंज में एक साल पहले एक युवती की पाशविक हत्‍या के बाद अब यूपी […]

आगे पढ़ें

बेफिक्र रहो बच्चियों, 1090 वाले सुरक्षा भले न करें, लुटी इज्‍जत छिपा लेगें

: ज्‍यादातर मामलों में तो दुष्‍कर्मों के मामले दबाने की साजिशें करता है प्रशासन, इशारा करती है सरकार : बेटियों की सुरक्षा का दम्‍भ भरने वाले समाजवादी सरकार के प्रशासन में सिर्फ साजिशों में महारत है : चाहे जौनपुर हो, कुशीनगर, हापुड़, कानपुर, आगरा या हो लखीमपुर खीरी, दुष्‍कर्म को दबाने की जुगत भिड़ाते हैं […]

आगे पढ़ें

सुतापा सान्‍याल को छोडि़ये, मेरी नजर में तो वह बहादुर बच्‍ची भारत-रत्‍न की हकदार है

: उसने अपनी दिखायी, और अपनी जिन्‍दगी को अपनी शर्त पर मौत के हवाले किया : दुराचारी और हत्‍यारे उस पर जुल्‍म ढाते रहे, मगर वह जूझती ही रही : फिर ऐसे आला अफसरों की क्‍या जरूरत, जो अपने दायित्‍वों को अपने स्‍वार्थो की वेदी पर बलि दे दें : चलिए, छेड़ दें “ना” कहने […]

आगे पढ़ें

पुलिस ने जिस लाश को वेश्‍या करार दे दिया था, मैं उसे अपनी बिटिया कहता हूं

: मोहनलालगंज के बलसिंह खेड़ा में दो साल पहले मिली थी खून से सनी एक युवती की नंगी लाश : आला पुलिस अफसर की “हां” ने बिखेर दीं यूपी की बेटियों की नंगी लाशें : कोई भी महिला अब सुतापा सान्‍याल को अपना आदर्श नहीं मानेगी : सरकारी कार्यशैली से गुम होता जा रहा है […]

आगे पढ़ें

नौकर, नौकर की नौकरी, नौकर के दायित्‍व और नौकर के कृत्‍य-कुकृत्‍य

: अतीत के लखनऊ में सरकारी नौकर बनाम बेटियों की रक्‍त-रंजित लाशें : मोहनलालगंज से शुरू हुईं थीं प्रदेश में नंगी बेटियों की बिखेरती लाशों की श्रंखला : हम नहीं मानते कि आप जल्‍लाद हैं, जवाब इसलिए तो चाहते हैं हम : चलिए, अब छेड़ दें “ना” कहने के अधिकार का आन्‍दोलन (तीन) : कुमार […]

आगे पढ़ें