धान एमएसपी: दावा 30 का, खरीद 13 में, बिक्री 22 पर

दोलत्ती

: सरकारी दरियादिली से 22 में बिका 30 रु का चावल : व्‍यापारियों ने किसानों से किस भाव धान खरीदा था चीन भेजने के लिए : सरकार राग अलापती रही एमएसपी का, लूटे गये किसान :

कुमार सौवीर

लखनऊ : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के नेतागण एकसुर में किसानों को दिलासा दे रहे हैं कि किसानों के हितों के खिलाफ कोई भी छेड़ हुई तो दोषी लोगों पर आपराधिक मुकदमा चलेगा और न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य हर कीमत पर अदा किया जाएगा। लेकिन ऐसे किसी भी वायदे, आश्‍वासन या दावे पर किसान यकीन करने को ही तैयार नहीं हैं। उनका दावा है कि जब आज ही किसान के साथ वाकई लूट हो रही है, तो फिर वे सरकार पर भरोसा कैसे कर पायेंगे।

किसानों का ऐतराज बेबुनियाद नहीं है। हकीकत यही है कि आज सवा महीने के अभूतपूर्व किसान आंदोलन के दौरान भी केवल छलावा ही कर रही है। सरकार ने प्रति कुंतल धान पर 1867 रुपयों की एमएसपी का जो ऐलान किया है, वह अगर ईमानदारी के साथ लागू कर दिया जाता, तो किसान को चावल उपज से 29.87 रुपया प्रति किलो का दाम मिल जाता। लेकिन प्रधानमंत्री का यह ऐलान का रंग किसान के खेतों में उग ही नहीं पाया है। अगर यूपी को ही देख लिया जाए, तो किसानों के खेतों से उपजे उम्‍दा किस्‍म के धान की कीमत 800 से लेकर 1300 रुपया प्रति कुंतल ही मिल पायी है।

सरकार के ऐलान और किसानों की मांगों को अगर आप सिलसिलेवार देखना और समझना चाहते हों, तो भारत में कृषि-उपज का देशज बाजार और कृषि-उपज के निर्यात की हालत को बिचारना होगा। आप देश के किसी भी क्षेत्र में खुले किसी भी किराना-दूकानदार से बासमती चावल की कीमत के बारे में तफ्तीश कर लीजिए। बासमती की किस्‍म की कीमतों की शुरुआत 50 रुपया प्रतिकिलो की दर से शुरू होती है। लेकिन हमारे चावल निर्यातकों ने इस बरस चीन को उम्‍दा किस्‍म का भारतीय बासमती चावल 22 रुपया 13 पैसा की दर से खिला डाला है। वह भी पड़ोसी देशों से 30 डॉलर प्रति टन से कम की दर से। मतलब सिरे से साफ है। दरअसल, मोदी बोले कि धान की कीमत एवरेस्‍ट सा मूल्‍य किसानों को दिया जाएगा, लेकिन सच तो यही रहा कि बनियों ने पाताल की दर से खरीदा। किसान फिर ठन-ठन गोपाल।

आइये, पहले किसान की उपज की हालत समझ लीजिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही लगातार अपना यही राग अलापते जा रहे हैं कि एमएसपी हर कीमत पर लागू होगी, और किसान को उसकी उपज का वाजिब दाम मिलने की गारंटी रहेगी। लेकिन सच तो यही है कि अकेले यूपी में ही किसान बुरी तरह मुंह की खा गया है। इलाहाबाद के कोरांव में उम्‍दा धान 800 रुपया प्रति कुंतल खरीदा गया है, खलीलाबाद में 900 रुपया और अमेठी में 1300 रुपया प्रति कुंतल। जबकि इस साल धान का एमएसपी रेट है 1867 प्रति कुंतल।

अब फिर मु‍ड़ जाइये इन किसानों की ओर। प्रति कुंतल धान से औसतन 62.5 प्रतिशत चावल निकलता है। यानी कोरांव इलाके में आठ सौ रुपया से खरीदे गये धान से महज 1280 प्रति कुंतल की कीमत वाला चावल निकलता है। यानी प्रति किलो 12.80 रुपया। इसी तरह खलीलाबाद में जिस धान की खरीद 900 प्रति कुंतल हुई है, वहां चावल 14.40 प्रति किलो की दर से मिलता है। जबकि अमेठी में 1300 प्रति कुंतल की दर से निकले चावल की कीमत 20.80 रुपया प्रति किलो पड़ती है।

लेकिन हमारी इसी उपज को हमारे के व्‍यापारियों ने इस बरस चीन के हाथों महज 22 रुपया 13 पैसा प्रति किलो की दर से बेच डाला है। वह भी करीब दस करोड़ किलो चावल। यानी दस लाख कुंतल अर्थात एक लाख टन चावल।

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