बलिया में आज ही पीटे जाएंगे कुमार सौवीर

दोलत्ती
: शनिवार को उतरेगा सनिच्चर, होगी जूतम-पैजार : बहाने से बुलाया जाएगा कुमार सौवीर को : पत्रकारों के ऐप समूह में कुमार सौवीर का खुलेआम हिंसक विरोध :
दोलत्ती संवाददाता
बलिया : बागी बलिया के पत्रकारों ने आखिरकार एकसुर में फैसला कर लिया है कि पत्रकार और पत्रकारिता के सम्मान पर कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा। जो भी ऐसी धृष्टता करेगा, तो उसे मुंहतोड जवाब दिया जाएगा। यह कार्रवाई किसी अभियान के तौर पर शुरू की जाएगी। इतना ही नहीं, इस अभियान की शुरुआती गाज दोलत्ती डॉट कॉम पर गिरने जा रही है। खबर है कि दोलत्ती डॉट कॉम के संस्थापक-संपादक कुमार सौवीर पर “चढी बेहूदी” पत्रकारिता का सनिच्चर दिनांक 29 दिन शनिवार को ही उतार दिया जाएगा। कुछ इस तरह व्यवस्था होगी, कि आइंदा किसी भी व्यक्ति में ऐसा लेखन करने की कल्पना सपने में भी न पनपे।
दोलत्ती डॉट कॉम पर छपी कुमार सौवीर की रिपोर्ट्स को लेकर बलिया के कुछ पत्रकार खासे नाराज हैं। जिले में पढेलिखे, विचारवान, सजग और पत्रकारिता के सिरमौर माने जाने वाले इन पत्रकारों ने फैसला किया है कि चाहे कुछ ही हो, कुमार सौवीर के सिर पर चढे पत्रकारिता के भूत वाला सनिच्चर किसी भी कीमत पर उतार ही देना होगा। अन्यथा पत्रकारिता के पितामह माने वाले पराडकर जी की आत्मा जिले के हम पत्रकारों को हमेशा धिक्कारती ही रहेगी।
गुस्से में उबलते जा रहे इन पत्रकारों की असली नाराजगी 24 अगस्त-20 को यहां फेफना में हुई रतन सिंह नामक पत्रकार की हत्या को लेकर छपी खबरों पर है। उनका कहना है कि कुमार सौवीर और उसके दोलत्ती डॉट कॉम ने बलिया के पत्रकारों की छवि पर कींचड फेंका है। और अब ऐसी हर हरकत का जवाब किसी भी कीमत पर दिया ही जाना चाहिए। फैसला हुआ है कि इसके लिए किसी बहाने से कुमार सौवीर को कहीं बुलाया जाएगा। मकसद होगा कि बलिया में पत्रकारिता जैसे किसी नये विषय पर चर्चा किया जाए। वगैरह-वगैरह।
विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि कुमार सौवीर को इस जूतम-पैजार के लिए आमंत्रित करने का जिम्मा इंडिया-टुडे वाले आजतक चैनल के प्रतिनिधि अनिल अकेला को सौंपा गया है। खबर है कि कुमार सौवीर को किसी एकांत माहौल में बुला कर उन्हें जम कर पीट दिया जाए। व्यवस्था कुछ इस तरह की जाए कि पत्रकारिता का भूत कुमार सौवीर के सिर पर से हमेशा-हमेशा के लिए उतर जाए। लब्बोलुआब यह कि इस तरह शनिवार दिनांक 29 अगस्त को कुमार सौवीर पर चढा पत्रकारिता का चढा भूत किसी भी कीमत पर उतार दिया जाए। इसके लिए हर कीमत अदा करने का संकल्प भी लिया जा चुका है।
पत्रकारों के इस फैसले के बाद आजतक न्यूज चैनल के प्रतिनिधि अनिल अकेला ने दोलत्ती डॉट कॉम के संस्थापक-संपादक कुमार सौवीर को औपचारिक रूप से बातचीत के लिए आमंत्रित भी कर लिया है। फोन पर हुई इस बातचीत में कुमार सौवीर को आमंत्रित तो किया गया है, लेकिन जब कुमार सौवीर ने वार्ता के विषय के बारे में जानकारी चाही, तो कुमार सौवीर ने बताया कि भेंटवार्ता में कुछ गुप्त चर्चा ही की जाएगी, जिसका खुलासा फोन पर किया जाना उचित नहीं होगा।
बबरहाल दोलत्ती डॉट कॉम के पाठकों के सुलभ अध्ययन के लिए पत्रकारों के उस समूह में चल रही संदेशों के आदान-प्रदान का स्क्रीन शॉट भी निम्नवत है। यह स्क्रीन-शॉट दोलत्ती डॉट कॉम और उसके संपादक कुमार सौवीर के एक शुभेच्छु पत्रकार ने मुहैया कराया है। बस दुख इस बात पर है कि अनिल अकेला से फोन पर हुई इस बातचीत को फोन पर रिकार्ड नहीं किया जा सका।

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1 thought on “बलिया में आज ही पीटे जाएंगे कुमार सौवीर

  1. निश्चित तौर पर आपकी लेखनी का कोई तोड़ नहीं है, बलिया जनपद में सहारा टीवी के प्रतिनिधि रतन सिंह की हत्या से जुड़ा हुआ आप ने जो खुलासा किया है निश्चित तौर पर वह आपकी दूरदर्शी पत्रकारिता कि निगाहों की देन है। लोग चाहे जो कहें लेकिन कहीं ना कहीं तो कुछ ऐसा इसमें पेंच फंसा हुआ है, जो आपके हाथ लगा है। अन्यथा कोई इतना कठोर और खुलासा भरा रहस्य उजागर करने का साहस नहीं करेगा। क्योंकि वैसे भी आज के दौर में कहां कोई अखबार या पत्रकार सच लिखने का साहस कर रहा है आज की पत्रकारिता पूरी तरह से चाटुकारिता में तब्दील हो चुकी है। सोशल मीडिया के दौर में इसने तो “तेल” के बजाय “सैनिटाइजर” में तब्दील कर दिया है।
    पत्रकार रतन सिंह की हत्या दु:खद और निंदनीय है तो साथ ही यह भी आवश्यक है कि हत्या का मूल वजह क्या रहा है?? यह भी जांच का विषय है? हत्यारे पकड़ लिए गए हैं, लेकिन अभी भी हत्या की मूल वजह सामने नहीं आई है।
    क्या वास्तव में पत्रकारिता की आड़ में रतन सिंह किसी और कार्य को अंजाम दे रहे थे? इस पर सटीक कलम चला कर कुमार सौवीर जी ने निश्चित तौर पर वर्तमान समय की पत्रकारिता की दशा और दिशा पर नजर डाली है। ऐसे में यह उनका लेख विचारणीय होने के साथ ही साथ चिंतन के लिए भी महत्वपूर्ण है, लेकिन दिक्कत है कि पत्रकारों का कुछ संगठन और कुछ पत्रकार रतन सिंह की हत्या के पीछे के मूल कारणों को जानने के बजाय अब कुमार कबीर सौवीर के ही पीछे पड़ गए हैं। इससे जाहिर होता है कि कुछ ऐसे परिंदे हैं जो हत्या के पीछे छुपे हुए मूल कारणों और उसकी सच्चाई को सामने नहीं आने देना चाह रहे हैं। वैसे यह कोई नई बात भी नहीं है। बात करे पूर्वांचल के कई जनपदों में पत्रकारों की कई ऐसी टोली है जो पत्रकारिता के आड़ में विभिन्न कार्यों को अंजाम देने के साथ ही साथ पत्रकारिता को महज ढाल बनाकर अपने स्वार्थ को सिद्ध करने में जुटी हुई है। पूर्व की कई घटनाओं पर नजर डालें तो इसका दागदार स्याह चेहरा भी सामने स्वतः आ जाएगा। जौनपुर, बनारस, मिर्जापुर, मऊ आजमगढ़ सहित कई जनपद इससे अछूते नहीं है। पत्रकारों की कुछ ऐसी भी टोली है जो मीडिया के नाम पर लूटने की मंडी का संचालन कर रही है।

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