हाईकोर्ट बार में हंगामा, कई सदस्‍य बर्खास्‍त

दोलत्ती

: बार पदाधिकारियों को गैर-कानूनी बताया था, सात सक्रिय पर चली तलवार : लखनऊ हाईकोर्ट बार एसोसियेशन को लेकर न्‍याय-परिसरों में अभूतपूर्व असमंजस :
दोलत्‍ती संवाददाता
लखनऊ : इलाहाबाद हाईकोर्ट की खण्‍डपीठ लखनऊ हाईकोर्ट बेंच वाले अवध बार एसोसियेशन में हंगामा खड़ा हो गया है। कारण है बार सदस्‍यों में जबर्दस्‍त अंतर्विरोध और गहरा असंतोष। हालत यह है कि इसी मामले पर अदालत तक पहुंचाने वाले बार सदस्‍यों को बार के पदाधिकारियों ने बार की सदस्‍यता से ही बर्खास्‍त कर दिया है। बर्खास्‍तशुदा सदस्‍यों ने खुद पर हुई इस कार्रवाई को तानाशाही और अराजकता के साथ ही गैरकानूनी भी साबित किया है।
आपको बता दें कि पिछले दो महीनों के दौरान अवध बार एसोसियेशन गंभीर असंतोष और अराजकता का केंद्र बनता जा रहा है। इस हालत के चलते हाईकोर्ट परिसर में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों में गुटबाजी तेज हो गयी है। एक ओर जहां विरोधी खेमे ने बार एसोसियेशन पर काबिज लोगों को तानाशाह और गैरकानूनी करार दिया है। वहीं बार में काबिज लोगों ने विरोधी खेमे के लोगों को बार की सदस्‍यता से ही बर्खास्‍त कर डाला है। बर्खास्‍त गये लोगों में कुछ वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता भी शामिल हैं। इनका नाम प्रशांत चंद्रा, श्रीराम राज, अजय कुमार राय, उमेश चंद्र सिंह, जीएल यादव, एस वर्मा और मदन गोपाल त्रिपाठी है। निष्‍कासन आदेश के मुताबिक इन लोगों को बार के खिलाफ माहौल बनाने और इस संदर्भ में पत्रादि जारी करने का आरोप है।
उधर बर्खास्‍तशुदा वकीलों की ओर से बताया जा रहा है कि बार एसोसियेशन पर गैरकानूनी तरीके से कब्‍जा करे लोगों ने तानाशाही का माहौल बना डाला है। उनका तर्क है कि पिछले दो महीनों से ही बार की कार्यकारिणी गैरकानूनी हो चुकी है। लेकिन इसके बावजूद बार पदाधिकारियों ने बार पर कब्‍जा किये रखा है। बार के पूर्व पदाधिकारी एसएम रहमान फैजी ने अपनी एफबी पर अपना विरोध दर्ज करते हुए कहा है कि बार एसोसियेशन अब अराजकता पर आमादा है। बार पदाधिकारियों ने यह हालत कर डाली है कि:- अपनी ख़ाला का घर समझ के पैसा खायें और लुटाये आप ।
फैजी लिखते हैं कि:- और अगर कोई सवाल करे तो उसके साथ घटिया हरकत करोगे। उनका कहना है कि मैं इस फैसले का पुरजोर विरोध करता हूँ। क्योंकि अब इनको इस तरह का प्रस्‍ताव पास करने का कोई अधिकार भी नहीं है।
फैजी की इस पोस्‍ट पर काफी लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दर्ज की हैं। मसलन Syed Akram Azad ऐसे रिसोल्यूशन को हम नही मानते, हम नही जानते…Bilkul Bade Bhai…
Brajesh Sinha काम तो मर्दों वाला किया है,जिसकी अवध बार को आदत नहीं
S M Rehman Faizy Brajesh Sinha इसमें कौन सी मर्दानगी की अपने सम्मानित सदस्यों को बिना किसी नोटिस के बाहर कर दे रहे है। वह भी पैसा हेर फेर के आरोप में।
वह भी कार्यकाल खत्म होने पथ
Brajesh Sinha S M Rehman Faizy
मरता हूँ इस आवाज़ पे कि हरचंद सर उड़ जाये,
जल्लाद को लेकिन वो कहे जाएँ कि हाँ और !
विवेक सिंह करन ने लिखा है कि:- एक हमारे मित्र हैं,परम मित्र हैं…..
आजकल तबीयत खराब है वह इसलिए वकालत करने नहीं आ रहे हैं पर उनका कथन था कि मुर्दा के बाल उखाडे चाहे छाती कहां या और कहीं का……
मुर्दा का वजन हल्का नहीं होता
अब जो उखाड़ना हो, उखाड़ लो|
Amit Pathak भैया बाल चाहे जहाँ के हों लेकिन अब लगता है कि जूता परेड की जरूरत है।
Anumesh Mishra बहुत ही शर्मनाक
Rajit Ram जाते जाते अपनी भद्द पिटा रहे हैं
Vivek Tiwari जो अपने ही elected body पर गंदे आक्षेप लगाए वो सम्मानित सदस्य नहीं हो सकता
Vivek Tiwari Brajesh Sinha भैया सही कहा
Brajesh Sinha Vivek Tiwari वह भी अपने लाभ के लिए इल्ज़ाम लगा रहे हैं.इन इल्ज़ाम लगाने वालों से पूछो कोई की आम अधिवक्ता के लिए आज तक कुछ भी न किए होंगे
Brajesh Sinha एक बार चार्ली चैप्लिन के हमशकल को जिता के देख लिया था,गम्भीर मुद्दों पे भी कोमेडी ही हुई थी
Vivek Tiwari ग़ालिब बुरा न मान जो वाइज़ बुरा कहें
होगा कोई ऐसा भी सब अच्छा कहें जिसे।।
Somesh Tripathi जाते जाते डुबो दिये।
Saqib Siddiqui Somesh Tripathi bhaiyya khud ko hi diboya inhone aisa kaam karke
Anumesh Mishra बहुत ही शर्मनाक
Deepak Singh Advo सच कहना कोई बगावत नहीं ,अगर फेंका है पत्थर पानी में ,तो लहरों का उठना कोई शरारत नहीं
Brajesh Sinha Deepak Singh Advo गर पत्थर ही शरारत से फैंका हो तो
Ajit Misra तब तो पानी वापस पत्थर फेकने वाले के सिर पे आएगा
Saqib Siddiqui totally illegal
When AGM has been held and charge is within elders committee how executive can hold a meeting.
A totally arbitrary act
Even if it was supposed to be a valid resolution even then the members who are terminated must have been served upon a show cause notice.
Sunil Kumar Mishra दुर्भाग्यपूर्ण है विरोध करता हूं।
Rehan Ahmad Siddiqui Outrightly termination was not warranted at this stage.
Amit Suryavanshi बहुत ज्यादा शर्मनाक, असंवैधानिक और दुर्भाग्यपूर्ण…. क्या ऐसी मंशा लेकर ये लोग आये थे ? अगर प्रश्न उठा है तो सामना करो अगर पाक साफ हो किसी जाँच से डर कैसा? प्रश्न पूँछने वालों को निष्कासित करने की कायरता दिखा रहे हो पर अफसोस वो नहीं होने जा रहा क्योंकि AGM के बाद चुनाव अधिकारी के कार्यभार ग्रहण करते ही तुम लोगों की हैसियत सिर्फ सामान्य अधिवक्ता जैसी, इसलिए ये resolution असंवैधानिक है….. Shame Shame, Disgusting
Amit Suryavanshi And I also appreciate and welcome Vaibhav ‘S courageous step
Prakhar Misra Bhai shukra ha kisi ke pas Oudh bar me zaban to hai hai…

3 thoughts on “हाईकोर्ट बार में हंगामा, कई सदस्‍य बर्खास्‍त

    1. श्रीमान एक अधिवक्ता जो सामान्य परिवार से इस पवित्र काम को करने आता है तो बहुत सपने होते है सारे बड़े वकील बाबू राजेंद्र प्रसाद लगते है और सारे—-भगवान ।फिर सपने बिखरते है वास्तविकता का पता चलता है तबतक उनको यूज़ किया जा चुका होता है और उनका अस्तित्वआम की चूसी गुठली की तरह होता है बाक़ी आप से मिलने की कामना है आप मिले तो हम कुछ और कहेंगे जो लिखने की हिम्मत नही है

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