भाजपा नेता ने अरबों वाली प्रापर्टी की धोखाधड़ी खुद की, फंसाया अपनी बीवी को। अब जमानत पर रिहा, केस शुरू

बिटिया खबर

: लखनऊ की ऐतिहासिक धोखाधड़ी में फंसा हुआ है बड़े भाजपाई का खानदान : सरदार  पटेल डेंटल कालेज और उसके संस्‍थापक की सारी सम्‍पत्ति पर गिद्ध-भोज : पूर्व सिंचाई मंत्री की बहू इस धोखेबाजी में जमानत पर, मुकदमा जारी : सरदार पटेल डेंटल कालेज को चबा डाला बड़े भाजपा नेता ने (चार)

कुमार सौवीर

लखनऊ : यह लखनऊ का एक ऐतिहासिक और ग्रेटेस्‍ट फ्राड का मामला है, जिसमें अरबों रूपयों की एक जबर्दस्‍त धोखाधड़ी की गयी। इस धोखाधड़ी भाजपा के एक बड़े नेता ओमप्रकाश सिंह का परिवार संलिप्‍त रहा। इतना ही नहीं, इस नेता ने इस फर्जीवाड़ा करने के लिए खुद को पर्दे के पीछे रखा, लेकिन अपनी पत्‍नी को फंसा दिया। अगर इस मामले का खुलासा नहीं हो पाता तो यह सारी की सारी सम्‍पत्ति सीधे ओमप्रकाश सिंह के खानदान को ट्रांसफर हो जाती।

लेकिन इसके पहले ही इस फर्जीवाड़ा का मामला खुल गया। अब हालत यह है कि पूर्व सिंचाई मंत्री ओमप्रकाश सिंह की बहू स्‍नेहलता सिंह पर जेल जाने की नौबत पहुंच गयी है। फिलहाल तो स्‍नेहलता जमानत पर बाहर हैं, लेकिन फारेंसिक जांच की रिपोर्ट चूंकि स्‍नेहलता के खिलाफ हो चुकी है, ऐसे में स्‍नेहलता को जेल जाने में अब कोई नहीं रोक सकता है।

यह मसला है सरदार पटेल डेंटल कालेज और उसके संस्‍थापक ओपी चौधरी की विशाल सम्‍पत्ति का, जिसे हड़पने के लिए बाकायदा ऐसी-ऐसी साजिशें बुनी गयीं, कि सुनने वाले लोगों का दिमाग भन्‍ना जाए। हुआ यह कि “अनुराग सिंह ऐण्‍ड कम्‍पनी ” ने सरदार पटेल डेंटल कालेज के संस्‍थापक ओपी चौधरी के फर्जी दस्‍तखतों से एक वसीयत बनायी।

इस वसीयत के मुताबिक चौधरी की अरबों रूपयों की सारी की सारी सम्‍पत्ति ओमप्रकाश सिंह की बहू स्‍नेहलता सिंह के नाम कर दी गयी। इतना ही नहीं, इस वसीयत के तहत यह साजिश की गयी कि चौधरी ने अपनी सारी चल-अचल सम्‍पत्ति की इकलौता वारिस स्‍नेहलता सिंह को बना दिया।

इस वसीयत में चौधरी ने अपनी पत्‍नी रामदुलारी चौधरी को और उनकी दो बेटी डॉक्‍टर सरिता और सुधा कटियार को अपनी सम्‍पत्ति से बिलकुल बेदखल कर दिया। ज्ञातव्‍य है कि स्‍नेहलता सिंह भाजपा के नेता और पूर्व सिंचाई मंत्री ओमप्रकाश सिंह की बहू तथा मिर्जापुर लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट से बुरी तरह जमीन सूंघ चुके अनुराग सिंह की पत्‍नी हैं।

लेकिन कई-कई बार हुई पुलिस और फारेंसिक जांचों के बावजूद यह साबित हो गया कि इस वसीयत को कूटरचित किया गया था तथा उसके आधार पर एक बहुत बड़ी धोखाधड़ी की गयी है। इन जांचों के बाद चौधरी की पत्‍नी रामदुलारी ने यह मामला 30 सितम्‍बर-11 को सीधे धोखाधड़ी के तौर पर पुलिस में पेश किया। पुलिस ने इस पर एफआईआर दर्ज कर ली। दस्‍तावेजों के कागजों की जांच के लिए पुलिस ने उसे फारेंसिक जांच विभाग के भेज दिया। इन जांचों में भी यह साबित हो गया कि इस वसीयत में ओपी चौधरी के दस्‍तखत पूरी तरह फर्जी साबित हो चुके हैं।

सूत्र बताते हैं कि इस फारेंसिक जांच के बाद “अनुराग सिंह ऐण्‍ड कम्‍पनी ” ने जांच रिपोर्ट पर आ‍पत्तियां दायर कर दीं। इस कम्‍पनी का आरोप था कि फारेंसिक वालों ने पुराने कागजातों का नमूना लिया है, जबकि नयी वसीयत में चौधरी के वास्‍तविक हस्‍ताक्षर थे। फारेंसिंक वालों ने इन नये कागजातों की भी जांच की। लेकिन इस बार की जांच में भी पाया गया कि उन पर दर्ज हस्‍ताक्षर ओपी चौधरी के नहीं, बल्कि पूरी तरह फर्जी और कूट-रचित हैं।

इन जांचों के बाद पुलिस ने 13 फरवरी-13 को आरोप-पत्र तैयार कर उसे अदालत को सौंप दिया, जहां सुनवाई लगातार चल रही है। (क्रमश:)

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